मणिमहेश की यात्रा से जुडी रोचक जानकारी

,मणिमहेश जिसे माना जाता है भोलेनाथ का निवास स्थान

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Information : देवभूमि हिमाचल प्रदेश में वैसे तो पूरे साल मेले और यात्राएं होती रहती हैं। पर मणिमहेश यात्रा का विशेष महत्व है । कहा जाता है के मणिमहेश यात्रा पर गुरु गोरखनाथ अपने 84 शिष्यों के साथ जा रहे थे तो भरमौर में रुके थे। भरमौर जिसे माता ब्रम्हाणी का निवास स्थान माना जाता था गोरखनाथ भरमौर में भगवान भोलेनाथ की अनुमति से रुके थे जब माता ब्रम्हाणी अपने भ्रमण से वापस लौटीं तो अपने निवास स्थान पर नंगे सिद्धों को देख कर आग बबूला हो गईं। भगवान भोलेनाथ के समझने के बाद ही माता ने उन्हें रात्रि विश्राम की अनुमति दी और स्वयं यहां से ऊपर साहर नामक स्थान पर चली गईं . मगर सुबह जब माता वापस आईं तो उन्होंने देखा कि सभी चौरासी सिद्ध वहां लिंग का रूप धारण कर चुके थे जो आज भी इस चौरासी मंदिर परिसर में विराजमान हैं। यह स्थान चौरासी सिद्धों की तपोस्थली बन गया, इसलिए इसे चौरासी कहा जाता है। गुस्से से आग बबूला माता ब्रम्हाणी शिवजी भगवान के आश्वासन के बाद ही शांत हुईं।

भगवान शिव के समझने के बाद ही माता नए स्थान पर रहने के लिए त्यार हुई . भगवन शिव ने माता को यह भी कहा के ब्रम्हाणी कुंड में स्नान किये बिना किसी भी यात्री की यात्रा सफल नहीं मणि जाएगी .हर साल मणिमहेश की यात्रा मणिमहेश ट्रस्ट के अधीन ही करवाई जाती है यात्रा के दौरान जगा जगा लंगर की वयवथा भी की जाती है और जगा जगा डॉक्टर भी रहते है ऊंचाई में स्थित होने की वजह से यहाँ ऑक्सीजन की कमी रहती है इसलिए जगा जगा ऑक्सीजन सिलिंडर भी मिल जाते है . 13500 फुट की ऊंचाई पर स्थित मणिमहेश की डल झील एवं कैलाश दर्शन में भोलेनाथ के प्रति लोगों में इतनी श्रद्धा बढ़ गई है कि मौसम एवं कड़ाके की शीतलहर के बावजूद लाखों की संख्या में शिव भक्त यहां आते हैं. वास्तव में पहले यात्रा तीन चरणों में होती थी। पहली यात्रा रक्षा बंधन पर होती थी। इसमें साधु संत जाते थे। दूसरा चरण भगवान श्री कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर किया जाता था जिसमें जम्मू काशमीर के भद्रवाह , भलेस के लोग यात्रा करते थे। ये सैंकड़ों किलो मीटर की यात्रा पैदल ही अपने बच्चों सहित करते हैं। तीसरा चरण दुर्गाअष्टमी या राधा अष्टमी को किया जाता है जिसे राजाओं के समय से मान्यता प्राप्त है। अब प्रदेश सरकार ने भी इसे मान्यता प्रदान की है। मणिमहेश कैलाश की उंचाई 18654 फुट की है जबकि मणिमहेश झील की उंचाई 13200 फुट की है। लोग मनीमहेश झील में स्नान करने के बाद अपनी अपनी श्रद्धा के अनुसार कैलाश पर्वत को देखते हुए नारियल व अन्य सामान अर्पित करते हैं झील के किनारे बने मंदिरों में भी सामान चढ़ाते हैं। हिमांचल गोवेर्मेंट की तरफ से यहाँ जगा जगा लंगर लगाए जाते है और टेंट की भी व्यवस्था की जाती है .अब तो हेलीकॉप्टर से भी यात्रा की व्यवस्था रहती है .

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