5000 का पपीता और 1000 का मटर का दाना .

,क्या कहे इससे अन्धविश्वाश या आस्था .

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Information : आज जहा दुनिया चाँद तरो पे पोहोंच चुक्की है वही हमारे देश के कुछ लोग इन ढोंगी बाबाओ के चक्कर में आ के बिना सोचे समझे अपना सुब कुछ लुटता देते है ! हम किसी जाट समुदाय या किसी धरम की निंदा नहीं कर रहे पर आप खुद ही सोचिये ये सुब कहा तक सही है ! अभी अभी डेरा सच्चा सौदा के बारे में खबर आयी है के गुरमीत बाबा 5000 में पपीता देते थे यहाँ तक की बैगन और घीया जैसी सब्जिया जो आम तौर पर बज्जार में 30 रुपया किल्लो से ज्यादा नहीं मिलती वो 1000 रुपए से ज्यादा में बिकती थी वो भी सिर्फ एक बैंगन की कीमत . सब्जियों की कीमत उनके अक्कर के हिसाब से लगायी जाती थी ! ये सब्जिया सिर्फ इसलिए इतनी महंगी बिकती थी क्यों की लोगो का मन्ना था के ये सब्जिया बाबा ने अपने हाथों से गाई है और इन्हे खाने से उनकी बीमारिया ठीक हो जाएँगी और उन्हें कोई बीमारी लगेगी भी नहीं ! अब आप खुद ही निर्णय लीजिये इससे अंध विश्वाश कहे या आस्था !

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