स्मॉग ने दिल्ली एनसीआर पर किया कब्ज़ा

,कैसे बचे स्मॉग से जाने के लिए खबर पढ़े

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Information : दिल्ली में जहरीले स्मॉग ने पिछले साल की तरह इस साल भी दस्तक दे दी है खांसी, दिल की बीमारी, त्वचा ,संबंधी रोग, बाल झड़ना, आंखों में जलन, नाक, कान, गला, फेफड़े में इंफेक्शन , ब्लड प्रेशर के रोगियों को ब्रेन स्ट्रोक की समस्या को ये बोहोत बढ़ावा देता है . स्मॉग शब्द स्मोक और फॉग से मिल कर बना है। खतरनाक गैसों और कोहरे के मेल से स्मॉग बनता है। गाड़ियों और फैक्टरियों से निकले धुएं में मौजूद राख, सल्फर, नाइट्रोजन, कार्बन डाई ऑक्साइड और अन्य खतरनाक गैसें जब कोहरे के संपर्क में आती हैं तो स्मॉग बनता है। इसका असर कई दिनों तक हो सकता है। तेज हवा चलने या बारिश के बाद ही स्मॉग का असर खत्म होता है। जहां गर्मियों में वातावरण में पहुंचने वाला स्मोक ऊपर की ओर उठ जाता है वहीं ठंड में ऐसा नहीं हो पाता और धुंए और धुंध का एक जहरीला मिश्रण तैयार होकर सांस के साथ शरीर के अंदर पहुंचने लगता है। स्मॉग कई मायनों में स्मोक और फॉग दोनों से ज्यादा खतरनाक है।

स्मॉग से बचने के लिए बहार निकलते वक़्त मास्क लगा कर निकले , साँस लेने में तकलीफ हो या लगातार खांसी होने पर तुरंत डॉक्टर से चेकउप करवाए , ५ साल से कम आयु के बचे नाज़ुक होते है इसलिए उनका स्मॉग में खास तोर पर ध्यान रखे हो सके तो उन्हें बहार ले कर न जाये , बुजुर्गो को भी स्मॉग से बचने की हिदायत दी जाती है . अधिक आयु हो जाने पर स्मॉग की वजह से सांस से संभंधित बीमारिया आसानी से अपनी गिरफ्त में ले सकती है .

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