सिर्फ 1 घंटे में पकाया जा रहा केला

,कैसे पहचाने इस ज़हरीले केले को और अपनी सेहत खराब होने से बचाये

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Information : केला एक ऐसा फल है जो हर की को भाता है . आज कल त्योहारों का मौसम चल रहा और आज कल तो केले और बाकी फलो की मांग बोहोत बढ़ जाती है पर बाजार मैं केला सबसे ज्यादा बिकने वाला फल है . मांग को देखते हुए व्यापारी केला पकाने के नए नए तरीके ढूंढ लेते है . ये अप्राकृतिक तरीके से पकाये गए केले सेहत के लिए ज़हर का काम करते है . ये देखने में सुन्दर पिले और बेदाग़ दीखते है पर असल में ये केले एक कार्बाइड से पकाये जाते है और ये केले सिर्फ 1 घंटे में बाजार में बिकने के लिए आ जाते है जो एक तरह का ज़हर है और इससे खाने से कई तरह की समस्याएं हो सकती है ये डायबिटीस और पाचन शक्ति से सम्भन्दित कई तरह की बीमारियों को न्योता देती है . इन फलो को खाने से हमारी आंतो में अल्सर हो सकता और लम्बे वक़्त तक इनका सेवन करने से हमे आंत का कैंसर भी हो सकता है .

कैसे करे इनकी पहचान . ये केले देखने में नीबू की तरह पीले और हलके हरे रंग के भी होते है कार्बाइड से पकने की वजह से इनमें कोई दाग धब्बा भी नहीं होता . ये एक दम साफ़ होते है . दूसरी तरफ प्राकृतिक तरीके से पकाये गए केले इतने साफ़ नहीं होते ये चित्ती दार होते है इन्हे खाने से कोई नुक्सान भी नहीं होता . सरकार ने भी कार्बाइड से केले पकाने पर पाबन्दी लगा रखी है . पहल केले बर्फ से पकाये जाते थे ये केले सेहत के लिए हानिकारक नहीं होते पर बर्फ से पकाये हुए केले थोड़े बदरंगे और गल जाते है जिसे ग्राहक सड़ा हुआ और ख़राब मान कर नहीं खरीदता . राजधानी में कार्बाइड से केले पकाने का काम आजादपुर, सुल्तानपुरी, मंगोलपुरी, नांगलोई, शालीमार बाग, जहांगीरपुरी, उत्तम नगर, आदर्श नगर, शकूरपुर, रामपुरा, बवाना और कंझावला में धड़ल्ले से हो रहा है

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