विष्णु भगवान की सुदर्शन चक्र प्राप्ति की कथा

,जब तीनो लोको में दैत्यों और दानवो ने मचाया था हाहाकार

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Information : हिन्दू धर्म में त्रिदेव यानि ब्रम्हा विष्णु और महेश को उच्च स्थान प्राप्त है . त्रिदेव को सभी देवो में सरव्श्रेष्ठ माना जाता है . आज हम आपको ये बातएंगे के विष्णु भगवान को सुदर्शन चक्र कैसे मिला . प्राचीन काल में दैत्य और दानव प्रबल हो कर देवता , मनुष्यो और ऋषि गणो को पीड़ा देने लगे . इससे तंग आ कर सभी देवता और ऋषि गण भगवान विष्णु के पास गए विष्णु भगवान ने उनसे कहा बताओ में तुम्हारी क्या सहायता कर सकता हू देवताओ ने दैत्यों के अत्याचार के बारे में भगवान श्री हरी विष्णु जी को बताया . ये सुन कर भगवान विष्णु ने उनकी सहायता करने का आश्वाशन दिया और वो कैलाश की तरफ भगवान शिव की आराधन करने निकल पड़े .

कैलाश पोहोंच कर उन्होंने शिव की आराधना शुरू कर दी . भगवान विष्णु हर बार शिव का नाम लेते और उन्हें एक पुष्प अर्पित करते . विष्णु भगवान ने वर्षो शिव की तपस्या की ये देख भोले नाथ ने उनकी परीक्षा लेने की सोची और जब विष्णु भवन शिव की आराधना के लिए पुष्प लेने गए तो शिव शंकर ने अपनी माया से एक पुष्प कही छिपा दिया . जब आराधना करते वक़्त उन्हें एक पुष्प कम लगा तो वो उससे ढूंढने लगे . श्री हरी विष्णु ने पूरे संसार में पुष्प ढूंढ लिया पर उन्हें कही नहीं मिला . अंत में उन्होंने अपने कमल वक़्त नेत्र को ही निकाल कर शिव को अर्पित कर दिया . ये देख शिव प्रसन हुए और उन्होंने कहा हे विष्णु में तुमसे बोहोत पर्सन हू मांगो जो मांगना चाहो . श्री हरी विष्णु ने कहा हे मेरे आरध्य शिव आप से भला क्या छुपा है पर फिर भी अगर आप मेरे मुख से सुन्ना चाहते है तो में आपको बताता हू . श्री विष्णु ने कहा दानव और दैत्यों ने बोहोत संहार मचा रखा है और मेरे सारे अस्त्र शस्त्र भी विफल हो चुके है हे शिव शंकर दैत्यों का नाश करने में मेरी सहायता करे . ये सुन कर शिव शंकर ने अपना सुदर्शन चाकर विष्णु को दे दिया और सुदर्शन मिलते ही विष्णु ने पल भर में दैत्यों का नाश कर दिया . पोस्ट अछि लगे तो शेयर जरूर करे

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