रावण को क्यों मारा था विष्णु भगवन ने

,विष्णु भगवान क्यों विवश हुए थे रावण को मारने के लिए

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Information : दोस्तों आज हम आपको बताएँगे कब माता पारवती ने शिवजी विष्णु जी नारद जी कार्तिके जी और रावण को दिया श्राप . दोस्तों एक बार भगवान शंकर ने माता पारवती के साथ दीयुत खेलने की इच्छा जाहिर की . दीयुत यानि के जुआ . माता पारवती और भगवान शंकर ने दीयुत खेलना शुरू कर दिया पर भगवान शंकर दीयुत में अपना सब कुछ हार गए . हारने के बाद शंकर भगवान अपनी लीला को रचते हुए पत्तो के वस्त्र पहन कर गंगा के तट पर चले गए . कार्तिके को जब ये बात पता चली तो वो पारवती जी के पास समस्त वस्तुए वापिस लेने के लिए आये पर इस बार पार्वती जी हार गयी . हारने के बाद सब कुछ ले कर कार्तिके शंकर भगवान के पास चले गए . ये देख माता पार्वती दुखी हो गयी और सोचने लगी सारा सामान भी गया और पति भी . माता पार्वती ने अपनी सारी व्यथ अपने पुत्र गणेश को बताई .

मात्र भक्त गणेश शंकर जी के पास गए और जीत कर सारा सामान ले ए . ये देख माता पार्वती ने कहा तुम्हे अपने पिता को भी लाना चाहिए था इसलिए गणेश जी दोबारा शंकर भगवान की खोज में निकल पड़े . शंकर भगवान से उनकी मुलाकात हरिद्वार में हुई . उन्होंने शंकर भगवान को चलने को कहा पर पार्वती जी से नाराज शंकर भगवान ने चलने से मन कर दिया . रावण ने बिल्ली का रूप ले कर गणेश जी के वाहन मूषक को डरा कर भगा दिया .उधर शंकर भगवान की इच्छा से विष्णु जी ने पासे का रूप धारण कर लिया . गणेश जी ने शनकर भगवान को माता के दुखी होने की खबर बताई . ये सुन शंकर जी ने कहा हमने एक नया पासा बनवाया है अगर तुम्हारी माँ इस पासे से खेल खेलने के लिए तैयार हो तो हम चल सकते है गणेश जी ने बात मान ली और सब लोग कैलाश आ गए माता पार्वती ने कहा अब ये पास क्या चीज है ये सुन शंकर भगवान चुप कर गए तभी नारद ने अपनी वीणा उन्हें दे दी . खेल शुरू हुआ इस बार माता पार्वती हारने लगी दो या 3 बार पासा फेंकने पर ही गणेश जी पासे का रहस्य जान गए और उन्होंने माता को बता दिया . ये देख पार्वती माता क्रोदित हो गयी . उन्होंने शंकर जी को श्राप दे दिया के तुम हमेश गंगा का बोज अपने सिर पर ढोते रहोगे इसलिए गंगा शंकर भगवान की जटाओ में आ गयी . नारद को एक स्थान पर न टिकने का श्राप दिया . कार्तिके को हमेश बाल रूप में रहने का श्राप दिया . विष्णु को शार्प दिया के ये रावण ही तुम्हारा शत्रु होगा और रावण को शार्प दिया के विष्णु ही तुम्हारा वध करेगा . इसी शार्प वश भगवान विष्णु ने राम अवतार ले कर रावण का वध किया था .

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