भीम कुंड के अनसुलझे रहस्य

,डिस्कवरी चैनल की टीम भी हुई नाकाम

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Information : भीम कुंड एक ऐसा कुंड है जो देखने मैं तो साधारण सा कुंड लगता है पर इसकी विशेषता ये है के जब भी ऐशिआ महद्वीप में कोई भी प्राकृतिक आपदा आने वाली होती है तो इस कुंड का पानी आश्चर्य जनक तरीके से बढ़ने लगता है . भीम कुंड एक तीर्थ स्थान है जो मध्यप्रदेश के छतरपुर से 77 किलोमीटर दूर बाजरा गांव मैं स्तिथ है जो ऊपर से देखने पर तो सामान्य सा लगता है इसकी चौड़ाई 50 से 75 मीटर लगती है रिसर्चर इसकी गहरायी नापने के लिए कई बार गोता खोरी करवा चुके है पार आज तक इसकी गहराई नहीं नापी जा सकी ये कुंड एक पहाड़ पर एक गुफा के अंदर है गुफा में ऐसा कटाव है के सूर्य की किरणे सीधी कुंड के पानी पर पड़ती है जिससे के कुंड का पानी कई रंगों का दिखने लगता है . आपने देखा होगा के जब कोई आदमी मर जाता है तो उसका शरीर पानी के ऊपर तैरने लगता है पर इस कुंड में ऐसा नहीं होता . इसमें मृत आदमी का शरीर आश्चर्य जनक तरीके से कही गायब हो जाता .

लोगो का कहना है के जब भी कोई प्राकृतिक आपदा आने वाली होती है तो इस कुंड का पानी अपने आप बढ़ने लगता . गुजरात और नेपाल में आयी आपदा के दौरान भी ऐसा ही हुआ था और जब 2004 जापान मैं सुनामी आयी थी उस दौरान तो इसमें 15 मीटर ऊँची लहरें उठने लगी थी जिसके बाद डिस्कवरी चैनल की टीम ने इस्पे रिसर्च करना शुरू किया था जिसके बाद ये देश विदेश की मीडिया में छाया रहा था . कहा जाता है के जहा ये कुंड है वहा एक जलधारा निचे बहती है जिसके कारन ये कुंड बना है पर आज तक कोई जियोलॉजी साइंटिस्ट ये प्रूफ नहीं कर पाया के इस जलधारा का स्त्रोत क्या है .डिस्कवरी चॅनेल की टीम भी कुछ पता नहीं लगा पायी थी न तो उन्हें ये पता चला इसमें लहरें उठने का क्या कारन है और न ही ये के इसकी जलधारा का स्त्रोत क्या है है पर उन्हें कुछ लुप्त जीव जंतु जरूर मिले . कहते है जब गोता खोर 80 फ़ीट निचे पोहोंचे तो उन्हें कुछ तेज जल की धराये जरूर मिली जो शायद इससे समुन्द्र से जुड़ती है डिस्कवरी चैनल की टीम ने बताया के अंदर दो कुंड है एक से पानी अंदर आता है और एक से बहार जाता है . यहाँ के जिला प्रशाशन ने एक बार इसमें 3 पंप लगा कर इससे खली करवाने का प्रयास भी किया पर इसका पानी एक इंच भी कम नहीं हुआ जिसके बाद काम रोक दिया गया . कहा जाता है भीम कुंड का सम्बन्ध महाभारत काल से है अज्ञात वास के दौरान जंगल और पहाड़ ही पाडवो का असर हुआ करते थे . कई दिनों तक जलाशय न मिलने के कारन उकने पास पानी ख़तम हो गया . एक पहाड़ पर पोहोंच कर द्रोपदी को प्यास लगी दूर दूर तक कोई जल स्त्रोत नहीं मिला तो भीम ने अपनी गदा से पहाड़ पर प्रहार किया जिससे पहाड़ की जमीन धस गयी और पहाड़ के बीचो बिच एक पानी की जल धारा फुट पढ़ी जिससे पांडवो और द्रोपदी ने पानी पी कर अपनी प्यास बुझाई . भीम द्वारा बनाये जाने के कारन ही इस भीम कुंड पड़ा . कुंड का पानी काफी साफ़ और स्वच्छ है . जिसकी वजह से काफी गहरायी तक की चीज़े साफ़ दिखती है . कहा जाता है इसका पानी हिमालय से ऐनी वाली जल धारा जो की मिनरल वाटर होती है उसी गुणवत्ता का है . पोस्ट अछि लगे तो शेयर जरूर करे

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