भगवन गणेश के एक दन्त बनने की कथा

,परशुराम और गणेश जी का जब हुआ युद्ध

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Information : क्या आप जानते है गणेश जी के एक दन्त बनने की कथा क्या है . भगवन शिव और माता पारवती की संतान प्रथम पूजनीय भगवन गणेश जी विघ्न हारता माने जाते है जब भी हमारे घर में कोई भी पूजा होती है तो सर्व प्रथम गणेश जी की ही वंदना की जाती है . आज हम आपको गणेश जी और परशुराम युद्ध के बारे में बताएँगे . एक बार भगवन शिव अपनी समाधी में लीन थे पर बार बार कोई न कोई देवता या दानव उनके पास आ कर उनकी समाधी भंग कर देता था इसी लिए भगवन शिव ने अपने पुत्र गणेश को बुलाया और कहा के जब तक में शमाधि में लीन हु तब तक किसी को अंदर मत माने देना . पिता की आज्ञा मानते हुए गणेश जी कैलाश के द्वार पर ही खड़े हो गए . बोहोत से देव और दानव आये पर गणेश जी ने किसी को अंदर नहीं जाने दिया . इसी बीच भगवन परशुराम अपनी समाधि से बोहोत दिन बाद उठे उनके मन में अपने आराध्य भोले नाथ से मिलने की इच्छा हुई और वो कैलाश की तरफ चल पड़े . कैलाश के द्वार पर उनकी भेंट गणेश जी से हुई . पर गणेश जी ने उन्हें अंदर जाने से रोका . परशुराम जी ने गणेश को अपने रस्ते से हटने को बोला और कहा मैँ उनका परम भक्त हु . परशुराम जी ने बल पूर्वक अंदर जाने का प्रयास किया पर गणेश ने उन्हें बाहर धकेल दिया जिससे गुस्सा होकर परशुराम ने गणेश से युद्ध करना शुरू कर दिया . गणेश जी ने उनके सारे प्रहार विफल कर दिए . अंत में उन्होंने शिव द्वारा दिया हुआ फरसा जो के बोहोत ही शक्ति शाली शास्त्र था . उन्होंने इसका उपयोग गणेश जी के ऊपर किया और उनकी तरफ फेंका . गणेश जी चाहते तो उसका प्रहार रूक सकते थे पर उन्होंने पिता द्वारा दिए गए शास्त्र का आदर करते हुए प्रहार अपने दन्त पे ले लिया . जिसकी वजह से उनका दन्त टूट गया . दर्द से गणेश जी माता माता चिल्लाने लगे . उनकी पुकार सुन के माता पार्वती वहा आ गयी और ये सुब देख क्रोधित हो गयी और उन्होंने दुर्गा का रूप ले लिया . ये देख परशुराम जी घबरा गए और अपने आराध्य शिव को पुकारा . शिव भी अपने भक्त की रक्षा के लिए वह आ गए और पार्वती को शांत करने लगे . उन्होंने कहा के हे पार्वती परशुराम ने हमारे पुत्र के कितने गन उजागर किये है आज एक उसकी सहनशीलता और दूसरा माता पिता की आज्ञा का पालन करते हुए अपने प्राणो का भी मोह त्याग देना . यही सुब बाते गणेश को प्रथम पूजनीय बनाती है . गणेश चाहता तो मेरे दिए शास्त्र को विफल कर सकता था पर उसने मेरा आदर करते हुए प्रहार सह लिया . ये सुन परशुराम जी को भी अपनी गलती का एहसास हो गया और उन्होंने गणेश जी से माफी मांगी और कहा के मैँ योगी और एक योद्धा हु पर जितनी सहन शीलता आपके अंदर है शायद ही इस संसार में किसी में हो हे विघ्न हारता . भगवन शिव ने गणेश जी को आशीर्वाद दिया और कहा आज से तुम्हे संसार एक दन्त के नाम से भी जानेगा . पोस्ट अछि लगे तो शेयर जोररो करे .

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