बैजनाथ के शिव मंदिर की कथा!

,रावण की एक गलती पड़ी उसपे भरी

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Information : शिव भगत रावण को भला कोन नहीं जनता ! रावण का नाम शिव भोले नाथ के परम भगतो में लिया जनता है आज हम आपको भोले नाथ और रावण से जुड़े हुए एक पवित्र सथल के बारे में बताने जा रहे है . पठानकोट से 125 किलोमीटर की दूरी पे हिमांचल प्रदेश के बैजनाथ में भोले नाथ का मंदिर है जिसकी कथा शिव और रावण से जुड़ी है कहते है के रावण ने तीनों लोको में अपना परचम लहराने के लिए भोले नाथ की कड़ी तपस्या की और उसने अपने दासो सिर काट के भोले नाथ को अर्पित कर दिए भोले नाथ ने खुश हो कर रावण को वरदान दिया ओर उसके दस्सो सिर भी लोटा दिए रावण ने इसके बाद एक ओर इच्छा जताई के भोले नाथ लंका चले उसके साथ भोले नाथ ने रावण की इसका पूरी करते हुए शिवलिंग का रूप लिया ओर रावण को बोलै इससे जहां भी तुम रखोगे ये वही स्थापित हो जायेगा. विष्णु भगवन जानते थे अगर भोले नाथ लंका चले गए तो रावण अजय हो जायेगा ! लंका जाते हुए रस्ते में रावण को लघु शंका के लिए रुकना पड़ा विष्णु भगवन गडरिये का रूप ले कर आये रावण ने शिवलिंग विष्णु भगवन को दे दिया जो के गडरिये के रूप में थे . जब रावण वापिस आया तो गडरिये ने शिवलिंग निचे रख दिया tha . रावण ने बोहोत प्रयास किया पर वो शिवलिंग नहीं उठा सका . आखिर में वो शिव की लीला समझ गया ओर उसने वही पे मंदिर बनवा दिया . त्रेता युग से ये मंदिर आज भी वैसे ही खड़ा है देश विदेश से लोग यहाँ आते है.

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