तुलसी के पतों को क्यों नहीं चबान चाहिए

,और सूर्य को अर्घ देना क्यों है आवश्यक

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Information : तलसी को सनातन धर्म में बोहोत एहम स्थान प्राप्त है . तुलसी न केवल ओषधिक गुणों से भरपूर है बल्कि सनातन धर्म में इसे धर्म से भी जोड़ कर देखा जाता है हमेशा से तुलसी के लक्ष्मी स्वरूपा होने के कारण चबाकर खाने को निषेध माना गया है। तुलसी को हमेशा जीब से मसल कर या फिर इसके पत्तो को चूसने की सलाह दी जाती है इसके साथ ही वैज्ञानिक तौर पर भी तुलती में आर्सेनिक होने की पुष्टि हुई है जो कि दांतों पर बुरा असर डालती है। इस कारण से तुलसी को हमेशा बिना चबाए खाना चाहिए । ऐसे ना केवल आप परंपराओं का मान रख पाएंगे बल्कि आपके दांत भी स्वस्थ बने रह सकेंगे।

सूर्य को सनातन धर्म में देव का स्थान प्राप्त है और इसे पूजनीय माना गया है पुरानी मान्यताओं के अनुसार सूर्योदय के समय अर्घ्य देने का विधान इसलिए बताया गया है, क्योंकि इस समय लगभग 45 मिनट तक सूर्य से निकलने वाली किरणें अल्ट्रा वायलेट किरणों से पूरी से तरह से मुक्त होती हैं। और इसका स्वस्थ पर अच्छा प्रभाव पड़ता है इन किरणों से शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होने के साथ ही आपकी ऊर्जा में गजब की वृद्धि होती है। इसी वजह से इस दौरान सूर्य नमस्कार से लेकर प्रदक्षिणा और मंत्र जप की परंपरा चली आ रही है, और अब भी बोहोत से लोग इसका पालन करते है हम सूर्योदय की किरणों के संपर्क में अधिक से अधिक रहकर इनसे होते स्वास्थ्य लाभ को गउठा सके और बिना डॉक्टर और वैद हकीमो के पास जाये स्वस्थ रह सके । पोस्ट अछि लगे तो शेयर जरूर करे

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