जब हनुमान जी ने प्राण त्याग दिए थे

,त्रिदेव को जब होना पड़ा विवश

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Information : जय श्री राम दोस्तों आज हम आपको पवन पुत्र हनुमान के बारे में कुछ रोचक बाते बातएंगे . आप सुब ने श्री राम और उनके भक्त हनुमान की तो अनेक गाथाये सुनी होंगी पर क्या आपको ये पता है के हनुमान जी जन्म से इतने शक्तिशाली नहीं थी . एक बार जब हनुमान जी सूर्य देव को फल समझ कर निगलने के लिए जाने लगे तो रस्ते में देव राज इंद्रा ने उन्हें रोकने का प्रयास किया और और उस वक़्त शनि देव भी उनके साथ थे . क्यों के अगर हनुमान सूर्य देव को निगल जाते तो सृष्टि का अंत निश्चित था इसीलिए शनि देव ने हनुमान जी को समझने का प्रयास किया पर वह नहीं माने अंततः जब हनुमान जी दोबारा आगे बढ़ने लगे तो इन्दर देव ने अपने वज्रा से उनपर पीछे से प्रहार कर दिया जिसकी वजह से हनुमान जी मूर्छित अवस्था में धरा पर गिर गए . ये सुब देख माता अंजनी चिंतित हो गयी और जब उन्होंने हनुमान को इस अवस्था में देखा तो उन्होंने पवन देव का आवाहन किया पवन देव जो के हनुमान की सुरक्षा के लिए वचन बढ़ थे और हनुमान के पिता भी थे . वो उसी वक़्त प्रगट हुए और उन्होंने विकराल रूप धारण कर लिया और पूरी पृथ्वी से सारी वायु सोकनि शुरू कर दी जिससे के सरे जीव जन्तु नष्ट होना शुरू हो गए .

ये सुब देख कर त्रिदेव को हस्तक्षेप करना पड़ा और अंततः भगवन शिव ने हनुमान के प्राण लोटा दिए और ये सुब देख कर बाकि सब देवताओ ने भी हनुमान जी को वरदान दिए विष्णु जी ने गदा दी पवन देव ने पवन शक्ति इन्दर देव ने उनके बाजार के सामान शक्तिशाली शरीर ब्रम्हा ने वरदान दिया के तुमसे बुद्धिमान इस पूरे संसार में कोई नहीं होगा . post अछि लगे तो शेयर जरूर करे .

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