जब हनुमान जी ने तोड़ा सत्यभामा गरुड़ और सुदर्शन का घमंड

,गरुड़ की थी जब जान पर बन आयी

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Information : दोस्तों आज हम आपको बातएंगे कैसे हनुमान जी ने दूर किया सत्यभामा , गरुड़ और सुदर्शन चक्र का घमंड . कभी कभी देवताओ को भी घमंड हो जाता . एक बार गरुड़ सत्यभामा और सुदर्शन को भी घमंड हो गया तो श्री कृष्ण ने उनका घमंड दूर करने के लिए हनुमान जी की सहायता ली . कृष्ण ने सत्यब्रह्मा को स्वर्ग लोक से पारिजात ला कर दिया था इसलिए उसे घमंड हो गया था की वो कृष्ण की सबसे प्रिय रानी है गरुड़ को अपनी तेज गति पे घमंड था और उसे लगने लगा था की श्री कृष्ण उसके बिना कही जा ही नहीं सकते और सुरर्शन को घमंड हो गया था की उसने इंद्र क़े वज्रा हो निष्क्रिय किया था और वह लोका लोक के अंधकार को दूर कर सकता है और भगवान श्री कृष्ण उसकी ही सहायता लेते है . श्री कृष्ण ने ये सुब देख हनुमान जी को बुलावा भेजा हनुमान जी ज्ञानी ज्ञान थे वो सब समझ गए के प्रभु ने बुलाया है तो कुछ तो बात है इसलिए वो दवारीका की तरफ चल पड़े . दवारीका पोहोंच कर उन्हें बोहोत भूख लगी और वो वाटिका की तरफ चले गए वहा जा कर उन्होंने जान मुच के वाटिका के फल खाने शुरू कर दिए और कुछ खा कर नीचे फेंक दिए . ये सब देख सैनिको ने हनुमान जी को रोकना चाहा पर वो विफल रहे और श्री कृष्ण के पास चले गए और बताया के एक वानर वाटिका में उत्पात मचा रहा . श्री कृष्ण ये सब सुनते ही समझ गए के ये लीला हनुमान जी की है उन्होंने गरुड़ को बुलाया और वानर को पकड़ कर लाने को बोला और साथ में सैनिक ले जाने को भी बोला .ये सुन गरुड़ ने कहा प्रभु एक साधारण से वानर को पकड़ने के लिए सेना की क्या जरूरत है उसे मै अकेला ही ले आऊंगा . ये बोले कर उन्होंने विदा ली और चले गए . हनुमान जी के पास जा कर गरुड़ ने कहा हे वानर मेरे साथ चलो तुम्हे श्री कृष्ण ने बुलाया है हनुमान जी ने उनकी बातों की तरफ ध्यान नहीं दिया और फल खाने लग पड़े . ये देख गरुड़ ने फिर से कहा मेरे साथ चलो वरना मुझे तुम्हे बल पूर्वक ले जाना पड़ेगा गरुड़ को अपनी तरफ आता देख हनुमान जी ने उन्हें अपनी पूंछ में लपेट लिया और दूर समुंद्र में फेंक दिया

गरुड़ जैसे तैसे वहा से श्री कृष्ण के पास गए और आप बीती सुनाई और कहा हे प्रभु वो साधारण वानर नहीं है ये सुन श्री कृष्ण ने कहा के वो श्री राम का भक्त है तुम उसे बोलो तुम्हारे आराध्य ने बुलाया . गरुड़ जी ने ऐसा ही किया और दोबारा वहा जा कर हनुमान जी से यही कहा . हनुमान जी साथ चलने के लिए तैयार हो गए और कहा तुम चलो में आता हु . ये सुन गरुड़ ने कहा मै तुम्हे पल भर में पहुंचा दूंगा मेरी पीठ पर बैठ जाओ . ऐसे तुम्हे बोहोत देर लगेगी ये सब हनुमान जी मुस्कुराये और कहा मेरी चिंता मत करो तुम जाओ मैं आ जाऊंगा तुम्हारे पीछे पीछे . गरुड़ जी ये सुन द्वारिका की तरफ चल पड़े . और उनके पीछे हनुमान जी भी चल पड़े . वहां श्री कृष्ण अपने कक्ष मैं सत्यबाहाम के साथ थे उन्होंने सुदर्शन को बुलाया और कहा के किसी को अंदर मतआने देना जब तक मैं न कहु . सुदर्शन ने ऐसा ही किया और द्वार पर खड़े हो गए . वहां हनुमान जी द्वारिका पोहोंच गए और अंदर जाने लगे सुदर्शन ने हनुमान जी का रास्ता रोक लिया हनुमान जी ने अनुरोध किया की मेरे आराध्य ने बुलाया है तब भी सुदर्शन ने कृष्ण की आज्ञा का पालन करते हुए अंदर नहीं जाने दिए . ये देख हनुमान जी ने सुदर्शन को पकड़ा और सुदर्शन को अपने मुँह में दबा लिया और कहा जब प्रभु ने बुलाया हो तो हनुमान को दुनिया की कोई शक्ति नहीं रोक सकती . हनुमान जी अंदर अये और तभी वहां गरुड़ भी हांफते हुए पोहोंच गए और हनुमान को वहां देख हैरान रह गए कृष्ण जी को अभिनन्दन कर हनुमान जी ने कहा प्रभु कैसे याद किया और सत्यभामा की तरफ देख कहा प्रभु ये दासी कौन बैठी है आपके साथ और माता सीता कहा है .ये सुन सत्यबाहमा का सर शर्म से निचा हो गया और उसका हकार टूट गया . तब श्री कृष्ण ने हनुमान को सुदर्शन को मुक्त करने को कहा . हनुमान जी ने ऐसा ही किया इस प्रकार सुदर्शन का भी अहंकार चूर चूर हो गया . गरुड़ की तरफ देखते हुए श्री कृष्ण ने कहा गरुड़ ये हनुमान है पवन पुत्र इनके सामान वेग से संसार में कोई नहीं उड़ सकता . ये सुन कर गरुड़ का भी हकार टूट गया और उन्होंने हनुमान से माफ़ी मांगी ..

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