जब भोले नाथ ने की अंग्रेज अधिकारी की युद्ध में रक्षा

,सच्ची घटना मंदिर के बहार प्रमाण भी मोजूद

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Information : अंग्रेज सेना के अधिकारी ने अपनी पत्नी को खत मैं लिखा था के युद्ध का माहोल बड़ा ही रत होता जा रहा था . अचानक ब्रीटिश सेना को पठानी सेना ने अफगानिस्तान में घेर लिया . कई सैनिक मारे गए . यहाँ तक की जान बचा कर भागना भी मुश्किल हो गया था पर उस विषम स्तिथि में ऐसी घंटना घटी जिसने मेरी ज़िन्दगी ही बदल दी . एक योगी जिनकी लम्बी जटाये और जिनके हाथ में 3 नोक वाला हथियार था . पठानी सेना उन्हें देखते ही भाग कड़ी हुई . उनके चेहरे से एक अलौकिक सा तेज़ बरस रहा था और हमारी हार एका एक जीत में बदल गयी . सुनने में आपको ये बात अटपटी लग रही होगी . पर ये बात बिलकुल सुच है और युद्ध में विजय होने के बाद उस अंग्रेज़ अधिकारी ने बैजनाथ मंदिर का जनमोद्वार करवाया था . ये सुब उल्लेख मंदिर की वेबसाइट और न्यूज़ पेपर्स में प्रकाशित हुई खबरों से मिल जाता .

मध्यप्रदेश के आगर मालवा नगर में श्री बैजनाथ मंदिर है इस मंदिर जा जनमोद्वार कर्नल मार्टिन ने 1883 में 15 हज़ार चंदा इकठा कर के करवाया था . इस बात का शिलालेख भी मंदिर में लगा हुआ है . ब्रीटिश सेना और पठानी सेना का युद्ध अफगानिस्तान में चल रहा था . और ब्रीटिश सेना का नेतृत्व कर्नल मार्टिन को सोपा गया . कर्नल मार्टिन वह से युद्ध का और अपना हाल नियमित रूप से अपनी पत्नी को भेजा करते थे पर कुछ समय बाद युद्ध भयंकर होने की वजह से वो ऐसा न कर पाए . इस बात से उनकी पत्नी बोहोत ही चिंतित हो गयी एक बार वो बैजनाथ मंदिर के सामने से गुजर रही थी तो मंदिर की गंटीयू की आवाज सून कर वो मंदिर के अंदर जाने से खुद को न रोक पायी . भोले नाथ के शिवलिंग के सामने जाते ही उनकी आंखों से आंसू टपकने लगे ये देख मंदिर के पुजारी ने उनसे दुखी होने का कारन पूछा और कहा भोले नाथ देवआदिदेव महादेव है वो सबके दुःख दूर करते है तब मार्टिन की पत्नी ने दुखी होने का कारन पुजारी जी को बताया . पुजारी ने उन्हें लागु रुद्र अनुष्ठान करवाने के लिए कहा उन्होंने ऐसा ही किया और अनुष्ठान का आयोजन किया और संकल्प लिया के अगर उनके पति सही सलामत आ जायेंगे तो वो मंदिर का जनमोद्वार करवाएगी . इसके कुछ दिन बाद ही मार्टिन घर वापिस आ गए और उन्होंने आप बीती अपनी पत्नी को बताई . ये सुब सून उनकी पत्नी अचंबित रह गयी और मार्टिन को पूरी बात बताई के उसने मार्टिन के लिए अनुष्ठान करवाया था और प्राथना की थी . इसके बाद मार्टिन ने अपनी पत्नी के संकल्प को पूरा करने के लिए चंदा इकठा किया और अंदिर का जनमोद्वार करवाया . तभी से इस पूरी घटना का मंदिर के बहार शीला लेख लगा हुआ .

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