चाँद से जुड़े कुछ चौकाने वाले रहस्य

,जिन्हे आप आज तक नहीं जानते

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Information : चाँद हमारी धरती के सबसे नज़दीक मोजूद सितारा है जिससे हम नंगी आँखों से भी स्पष्ट देख सकते है . इंसानो के लिए चाँद हमेशा ही जिज्ञासा का विष रहा है और हर कोई इस्पे जाने के सपने देखता है कुछ लोगो का मानना हैं कि चाँद पर उतरना मात्र एक अफवाह थी. वे सोचते है आज तक चंद्रमा पर कोई गया ही नही हैं. ऐसी अफ़वाहें तो उड़ती ही रहती है ! चाँद हमारी धरती का एकमात्र एकलौता उपग्रह है ! बैज्ञानिको का मनना है की आज से 500 करोड़ साल पहले थीसिस नमक एस्टेरोइड धरती से टकराया और धरती का कुछ हिस्सा टूट कर अलग हो गया जो की बाद में चाँद बना ! और उस टाइम चाँद पूरी तरह गर्म लावा के रूप में मोजूद था ! चाँद लगभग 28.4 दिन में धरती का एक चक्कर पूरा करता है ! धरती के समंदर में आने वाली ज्वर और भाटे के लिए चाँद ही जिम्मेदार है ! अगर चाँद के कुछ रोचक तथ्य की बात करे तो चाँद पे अभी तक 12 मनुष्य जा चुके है ! और यहाँ तक की पिछले 42 साल से भी दोबारा कोई चाँद पे नही गया है ! धरती से कम्पयेर करे तो ये जानकार आपको हैरानी होगी की धरती चाँद से 50 गुना ज्यादा बड़ा है ! जिसका वजन 82 अरब टन अनुमान लगाया गया है ! पूरा चाँद आधे चाँद से 9 गुना ज्यादा चमकदार होता है.अगर चाँद किसी वजह से गायब होता है तो धरती पे दिन सिर्फ 6 ऑवर के ही होंगे !

चंद्रमा पर मनुष्य द्वारा छोडे गए 96 बैग ऐसे है जिनमें मल,मूत्र और उल्टी है। चंद्रमा की सतह पर धूल का गुबार सूर्योदय और सूर्यास्त के समय पर मंडराता रहता है। इसका असली कारण अभी तक पता नहीं चल सका है। चांद पर करीब 1 लाख 81 हजार 400 किलो का मानव निर्मित मलबा पड़ा हुआ है जिसमें 70 से अधिक अंतरिक्ष यान और दुर्घटनाग्रस्त कृत्रिम उपग्रह भी शमिल हैं।ये जानकर हैरानी होगी कि आपके मोबाइल फोन में अपोलो 11 यान के चंद्रमा लैंडिग के समय यूज किये गए कंप्यूटर की तुलना में अधिक कंप्यूटिंग शक्ति है। मांस हुय्गेंस चाँद की सबसे ऊँची चोटी है. इसकी लंम्बाई लगभग 4700 मीटर है. (माउंटऐवरेसटकी 8848 मीटर है). चन्द्रमा पे बात करना संभव नही है ! चाँद अपने ऑर्बिट पे 1.022 किलोमीटर की रफ़्तार से घूमती है वही पृथ्वी सिर्फ 465 मीटर पैर सेकंड के रफ़्तार से ! पृथ्वी की तरह चन्द्रमा पे भी भूकंप आते है पर चन्द्रमा पे पृथ्बी की तरह कोई टेकटोनिक प्लेट नही है ! चाँद पे मैग्नेटिक फील्ड ना होने के कारन वहाँ मैग्नेटिक कपास काम नही करती है ! सूर्य की रोशनी पृथ्वी तक पहुचने में ८ मिनट्स से भी ज्यादा टाइम लगते है जबकि चाँद की रोशनी सिर्फ 2 सेकंड में पहुच जाती है ! अगर चाँद की सतह पे कोई तेज़ रफ़्तार से चलना चाहे तो वह कंगारू की तरह उछलने लगेगा इसीलिए चाँद की सतह पे चलने के लिए लूनर रोवर व्हीकल का इस्तेमाल किया जाता है ! जो 4 पहियो का है और इसकी अधिकतम रफ़्तार 17 किलोमीटर प्रति घंटे है ! चन्द्रमा के गुरुतवाकर्षण बल की वजह से पृथ्वी के समुद्रों ज्वर bhata आती है और पृथ्वी के गुरुतवाकर्षण बल की वजह से चन्द्रमा पे भूकंप और इसकी सतहों पे दरारे आजाती है ! कभी कभी चंद्रग्रहण के दौरान चन्द्रमा लाल या भूरा दिखाई देता है ऐसा इसीलिए होता है क्यों की सूर्य की रोशनी पृथ्वी के वायुमण्डल से गुजरते हुए चाँद पे पड़ती है ! वायुमंडल इस रोशनी को फ़िल्टर कर देता है लेकिन लाल रंग के तरंग अधिक होने की वजह से इस रंग की रोशिनी चाँद तक पहुच जाती है ! कभी कभी चाँद पर कुछ रंगीन तरंगो को देखा गया है बैज्ञानिको का मनना है की ये सतह के अंदर से निकलने वाली गैस का प्रभाव है और हाल ही में चन्द्रमा पे हीलियम नीयन और आर्गन जैसी गैस के सूक्ष्म मात्रा पायी गयी है ! हिन्दू पंचांग में पूर्णिमा, अमावस्या, चंद्रगहण इत्यादि का दिन और समय सैकड़ो साल पहले तय किया गया था और ये हमेसा सही साबित हुआ है ! पूर्णिमा के दिन कई मानसिक रोगियों के व्यबहार में परिवर्तन देखा गया है और कुछ लोग पूर्णिमा के रात को ठीक से सो नही पाते इसके पीछे की वजह अब तक रहस्य बानी हुई है ! चन्द्रमा की सतह पे धूल का गुबारा सूर्योदय और सूर्यास्त के समय मडराता रहता है और इसका असली कारन अभी तक पता नही चल पाया है ! नासा के मसहूर अंतरिक्ष साइंटिस्ट Alan shepherd जब चाँद पे गए थे तब उन्होंने एक ग्लोफ बॉल को हिट मारा जो की तक़रीबन 800 किलोमीटर दूर तक गयी थी ! अगर धरती पे आपका वेट 60 किलो है तो चाँद पे low ग्रेविटी के वजह से आपका वजन चाँद पे सिर्फ 10 किलो होगा ! जब सारे अंतरिक्ष यान चाँद से वापस आए तो कुल मिलकर लगभग 300 चट्टानों के टुकड़ो को धरती पे लेके आए थे जिसका कुल वजन 382 किलो था ! वैसे तो हम धरती से चाँद का सिर्फ 60 प्रतिसत हिस्सा ही देख पाते है ! आधा भाग हमेशा धरती से नहीं दीखता जिससे मनुष्य अभी तक अवगत नहीं है .

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