क्या आपने देखा है अजमेर दरगाह पर हवा में तैरता हूआ पत्थर

,डिस्कवरी चैनल और वैज्ञानिक भी नही खोज पाए इसका राज

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Information : दुनिया में आपने बहुत से अजीब और गरीब किस्से सुने होंगे परन्तु आज जो किस्सा हम आपको बताने जा रहे है . यह किस्सा कोई आम किस्सा नही है अभी तक इस किस्से को डिस्कवरी चैनल और वैज्ञानिक भी नही सुलझा पाए और आज तक यह किस्सा केवल राज बना हुआ है . हम आपको बता दे की हम बात कर रहे है अजमेर सरीफ की दरगाह जो अजमेर राजस्थान में स्थित है . देखा जाता है की दरगाह पर एक पत्थर रखा है जी धरती से लगभग 4 इंच से भी उपर हवा में तैर रहा है . जिसके बारे में ना तो आज तक कोई वैज्ञानिक पता कर पाया है और ना ही कोई चैनल आइए जानते है विस्तार से .

माना जाता है की अजमेर दरगाह का निर्माण राजा अकबर ने सुरु किया था . परन्तु निर्माण आधीन ही राजा अकबर की मौत हो गयी थी इसके बाद राजा जहागीर ने अजमेर दरगाह के निर्माण को पूरा कराया था . अजमेर दरगाह का पूरा नाम मोइनुद्दीन चिश्ती दरगाह है देखा जाये तो दरगाह को बहुत ही सुंदर नकासी करके बनाया गया है .सबसे ज्यादा सुंदर दरगाह का प्रवेश द्वार और गोल गुम्बंद है जो लोगो को अपनी और आकर्षित करते है . माना जाता है की इस पवित्र दरगाह पर केवल मुस्लिम ही नही बल्कि हिन्दू भी बहुत आते है . साथ ही साथ कहा जाता है जो दरगाह पर रोता हआ आता है वह हमेशा यहाँ से हस्ता हआ ही जाता है . क्योंकि यहाँ आने वाले हर इंसान की इच्छा बाबा मोइनुद्दीन चिश्ती जरुर पूरी करते है . मोइनुद्दीन चिश्ती यानी अजमेर दरगाह राजस्थान में तारागड पहाड़ी पर स्थित है . और पहाड़ी पर चांदी से बना एक कटघरा है जिसके अंदर मोइनुद्दीन चिश्ती की पवित्र दरगाह बनी है . कहा जाता है की मन्दिर में लगा ये चांदी का कटघरा राजस्थान के ही राजा महराज जयसिंह ने दरगाह को भेट किया था . दरगाह पर हर रोज लाखो की तादात में श्रद्धालु आते है . आज तक पत्थर का राज कोई नही जान पाया है की यह पत्थर धरती से लगभग 4 इंच उपर किस चीज़ पर रखा हआ है . जो भी इस हवा में तैरते पत्थर को देखता है वो ही इंसान हैरत में पड़ जाता है . परन्तु आज तक कोई भी वैज्ञानिक और न ही कोई मिडिया चेनल इस बात का पता लगा पाया है की आखिर इसके पीछे क्या राज है . लोगो के अनुसार माना जाता है की एक बार एक अजीब प्राणी बाबा मोइनुद्दीन चिश्ती को परेशान कर रहा था . उस समय बाबा मोइनुद्दीन चिश्ती ने उसको पत्थर बनने का श्राप दे दिया . जब उसने अपनी भूल स्वीकार की और बाबा से माफ़ी मांग कर बोला की मुझे फिर से मेरा जीवन वापस लौटा दो . तो बाबा ने कहा की में तेरा जीवन तो वापस लौटा नही सकता परन्तु तुजको धरती से उपर रख दूंगा . जिस कारण से तू भी मेरे साथ पूजा जाएगा आज बाबा के साथ पत्थर की भी पूजा होती है.

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