कही आप भी तो नहीं खा रहे नकली केले

,कही केले के रूप में आप भी तो नहीं खरीद रहे मौत का सामान

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Information : अगर आप केला खाते है तो आपको इस पोस्ट को जरूर पढ़ना चाहिए . 40/- से 50/- रु दर्ज़न की दर से मृत्यु बेची जा रही है। सबसे विनती है कि केले खरीदते समय' सावधान रहें । अगर आप हमारी पूरी पोस्ट को पढ़ेंगे तो अपने आप समझ जायेंगे की नकली केले में क्या फर्क होता है

हम सभी केले पसंद करते हैं और इनका भरपूर स्वाद उठाते हैं परंतु अभी बाज़ार में आने वाले केले कार्बाइडयुक्त पानी में भिगाकर पकाए जा रहे हैं , इस प्रकार के केले खाने से 100% कॅन्सर या पेट का विकार हो सकता है. इसलिए अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करें और ऐसे केले ना खाएँ। परंतु केले को कार्बाइड का उपयोग करके पकाया है इसे कैसे पहचानेंगे :- यदि केले को प्राकृतिक तरीके से पकाया है तो उसका डंठल काला पड जाता है और केले का रंग गर्द पीला हो जाता है । साथ ही केले पर थोड़े बहुत काले दाग रहते हैं । परंतु यदि केले को कारबाइड का इस्तेमाल करके पकाया गया है तो उसका डंठल हरा होगा और केले का रंग लेमन यलो अर्थात नींबुई पीला होगा इतना ही नही ऐसे केले का रंग एकदम साफ पीला होता है उसमे कोई दाग धब्बे नहीं होते। कारबाइड आख़िर क्या है , यदि कारबाइड को पानी में मिलाएँगे तो उसमें से उष्मा (हीट) निकलती है और अस्यतेलएने गॅस का निर्माण होता है जिससे गाँव देहातों में गॅस कटिंग इत्यादि का काम लिया जाता है अर्थात इसमें इतनी कॅलॉरिफिक वॅल्यू होती है की उससे एल पी गी गॅस को भी प्रतिस्थापित किया जा सकता है . जब किसी केले के गुच्छे को ऐसे केमिकल युक्त पानी में डुबाया जाता है तब उष्णता केलों में उतरती है और केले पक जाते हैं , इस प्रक्रिया को उपयोग करने वाले व्यापारी इतने होशियार नहीं होते हैं कि उन्हें पता हो की किस मात्रा के केलों के लिए कितने तादाद में इस केमिकल का उपयोग करना है बल्कि वे इसका अनिर्बाध प्रयोग करते हैं जिससे केलों में अतिरिक्त उष्णता का समावेश हो जाता है जो हमारे पेट में जाता है जिससे अनेक प्रकार की बीमारिया हो जाती है।

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