अरुणाचल में चीन बना रहा था सड़क

,भारतीय सेना ने वापिस भेजा

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Information : अरुणाचल प्रदेश में चीन सैनिक 1 km तक अंदर घुस आये . चीनी सैनिक यहाँ सड़क का निर्माण करना चाहते थे . किसी भी सीमावर्ती इलाके में सड़क बनाने के लिए चार स्टेजेस होती है सर्वे, अलाइनमेंट, फॉर्मेशन और कारपेटिंग ! सर्वे के तहत सड़क बनाने के लिए इलाके का जायजा लिया जाता है चीनी सैनिको ने ये काम कब किया सुरक्षा एजेंसियों को इसकी कोई खबर नहीं . भारतीय सेना जब वह पोहंची तो 1km तक अलाइनमेंट का काम हो चूका था . अलाइनमेंट से सड़क की दिशा तय होती है फॉर्मेशन से सड़क की खुदाई की जाती है जब सेना वह पोंछी तो 400 मीटर तक फॉर्मेशन हो चुकी थी;चीनी सेना की चूंकि 1 KM दूर है यहाँ से और वह तक सड़क पक्की है

जब भारतीय सुरक्षाकर्मियों ने टूटिंग से चीन के लोगो को काम रोकनेको बोला तब उन्होंने ने कहा के वो अपने इलाके में काम कर रहे है . जब उनके सामने दस्तावेज पेश किये गए तो वो वह से चले गए और अपनी मशीने भी वही छोड़ गए . अब भारतीय सेना ने चीनी सेना से संपर्क किया है और मशीने ले जाने के लिए बोला है .चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बुधवार को भारतीय सीमा के अंदर घुसने की बात पर टिप्पणी नहीं की, लेकिन कहा कि वह अरुणाचल प्रदेश का अस्तित्व नहीं मानता है। गौरतलब है कि अरुणाचल प्रदेश को चीन दक्षिण तिब्बत मानता है। उसका मानना है कि अगर पूरा प्रदेश न सही तो इसका तवांग इलाका उसे सौंप दिया जाना चाहिए। वह भारतीय नेताओं की अरुणाचल यात्रा पर ऐतराज जताता रहा है। इससे पहले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण, तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा और अमेरिकी राजदूत की अरुणाचल यात्रा पर चीन ऐतराज जता चुका है। मोदी 2015 में भी अरुणाचल गए थे और तब भी चीन ने विरोध जताया था। मोदी की अगली अरुणाचल यात्रा इसी साल संभावित है, लेकिन इसकी तारीख तय नहीं है।

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