अकबर और बीरबल का क्या है हिमाचल के काँगड़ा के किले से सम्बन्ध

,क्यों बनाना चाहता था अकबर बीरबल और राजा

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Information : नमस्कार दोस्तों आप सब ने अकबर और बीरबल का नाम और उनके किस्से तो सुने ही होंगे . अकबर और बीरबल से जुडे किस्से और कहानिया हमे आज देखने और सुनने को मिलती है पर आज हम बात करने जा रहे है अकबर के नव रतन में से एक बीरबल की .

बीरबल ने अपनी सूझ बूझ और समझदारी से अकबर पर ऐसा जादू कर दिया के अकबर ने उसे अपने दरबार में वजीर का ओहदा दे दिया पर बात यही नहीं रुकी मन जाता है के अकबर ने बीरबल को राजा बनने का भी मौका दिया था ये बात उस वक्त की है जब हिमांचल के काँगड़ा पर महाराजा जयचंद्र का राज हुआ करता था 1570 में महाराजा ने दिल्ली और आगरा में हवेली भी बनवायी थी माना जाता है के मुग़ल और काँगड़ा वासियो की एक दुसरे से बनती नहीं थी इस कारन दोनों के बीच मन मुटाव हमेशा रहता था . कहते है की इसी वजह से ही अकबर ने महाराजा जयचंद्र को अपना बंदी बना लिया था इसके बाद उनके पुत्र ने खुद को उत्तर अधिकारी घोषित कर दिया था और अकबर के खिलाफ अपना विद्रोह शुरू कर दिया तब अकबर ने पंजाब के सूबेदार हुसैन कुली खान को हुक्म दिया की काँगड़ा पर कब्ज़ा कर के वो राज्य बीरबल को दे दिया जाये और उन्हें वहाँ का राजा बना दिया जाये इसके बाद हुसैन कुली खान ने सेना इकठी कर जंग का साजो सामान ले कर काँगड़ा पर हमला करने के लिए त्यार हो गया. मुग़ल सेना ने काँगड़ा को कमजोर करने के लिए दिल्ली के काँगड़ा में स्तिथ काँगड़ा की एक टुकड़ी से जंग की और उन्हें हरा दिया इसके बाद मुग़ल सेना काँगड़ा की तरफ बढ़ने लगी और 2 दिन के भीतर ही काँगड़ा के किले को चारों तरफ से घेर लिया . मुग़ल सेना ने काँगड़ा पर अपना दबदबा बना लिया मुग़ल सेना जीतने ही वाली थी के तभी पंजाब में मुगलो के खिलाफ विद्रोह शुरू हो गया इसलिए मुग़ल सेना को काँगड़ा से हटना पड़ा . अकबर इस मूके को हाथ से जाने नहीं देना चाहता था इसलिए उसने राजा जयचंद्र और उनके बेटे से इस मुद्दे पर बात की और कई संधिया भी की समझौते के अनुसार राजा बीरबल को धीर सारा सूना और काँगड़ा के किले के पास मस्जिद बनवा कर दी गयी हालांकि बीरबल काँगड़ा के पूर्णतम राजा नहीं बन सके पर कई साहित्य कारो ने उन्हें राजा कह कर भी सम्बोधित किया है और अकबर के दरबार में भी उन्हें राजा बीरबल ही कहा जाता था .

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